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VANAUSHADI VISHESHANK SET I to VI
वनौषधि विशेषांक: आयुर्वेद का अमूल्य खजाना आयुर्वेदाचार्य पंडित कृष्ण प्रसाद जी द्वारा रचित 'वनौषधि' विशेषांक छह खंडों में उपलब्ध है, जिसमें प्रत्येक खंड में 400 पृष्ठ हैं। सन 1955 में प्रकाशित यह ग्रंथ हर वैद्य के अनुभव का सार है। इसमें हर पौधे का असली स्वरूप, उपयोग, औषधीय गुण और सही पहचान विस्तार से दी गई है। यह पुस्तक आपको बताती है— कौन सी जड़ी-बूटी किस रोग में सहायक है, उसे कैसे पहचाना जाए, कब और कैसे उसका प्रयोग हो, हर वनौषधि की चित्रमय तस्वीर पुस्तक में उपलब्ध है। वनौषधि विशेषांक आयुर्वेद प्रेमियों और वैद्यों के लिए अनमोल धरोहर है।.
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